Chadhti Jaewani Ka Mera Pahla Sex Anubhav – चढ़ती जवानी मेरा पहला सेक्स

दोस्तो, आज आपको मैं अपनी एक बड़ी पुरानी कहानी सुनाने जा रहा हूँ। यह बात तब की है जब मैं सिर्फ 18 साल का था। मैं, मेरा छोटा भाई और मम्मी पापा हम सिर्फ चार लोगों का परिवार था। हम उस वक़्त किराए के घर में रहते थे और हमारे साथ वाला जो घर था, उसमें भी एक परिवार रहने के लिए आया। Chadhti Jaewani Ka Mera Pahla Sex Anubhav.
उस परिवार में मियाँ बीवी, और उनकी दो लड़कियाँ थी, बड़ी लड़की 20 एक साल की थी, छोटी मेरी उम्र की थी।
मम्मी पापा की उन लोगों से थोड़ी बहुत बातचीत होती थी मगर हम चारों बच्चों में कभी कोई बातचीत नहीं हुई, न ही हम में से किसी ने कभी एक दूसरे को बुलाया।

गर्मियों के दिनों में हम सब छत पे सोते थे, पड़ोसी परिवार भी छत पे ही सोता था। दोनों घरों की छत के बीच में सिर्फ एक ढाई तीन फीट की दीवार थी, जिसे बड़ी आसानी से फाँदा जा सकता था।
छत पे हमारे एक बरसाती बनी थी जिसमें हम अपने बिस्तर वगैरह रखते थे, वैसी ही एक बरसाती पड़ोसियों के घर भी बनी थी।

शाम को मैं अक्सर छत पे पढ़ने के बहाने चला जाता था, मगर असल में मैं बरसाती में बैठ कर सेक्सी कहानियों वाली किताबें पढ़ता था और मुठ मारता था, हफ्ते में एक दो बार तो पक्का यह काम करता ही था।

ऐसे ही एक दिन मूड बन रहा था, मैं अपनी किताबें लेकर शाम को छत पे चला गया। मौसम बड़ा सुहावना था।

जब मैं छत पर गया तो देखा कि पड़ोसियों की छोटी बेटी जिसका बाद में मुझे नाम पता चला, निशा, एक बिना बिस्तर की चारपाई पे लेटी थी, उसने एक टी शर्ट और मैचिंग पाजामा पहन रखा था, हमारे घर की तरफ उसकी पीठ थी।
मगर उसके करवट लेकर लेटे होने की वजह से उसके कपड़े उसके बदन से चिपके पड़े थे, जिस वजह से उसके पाजामे में उसके गोल गोल हिप्स की शेप बड़ी खूबसूरत बन रही थी और मुझे उसे देख कर यह भी पता चल गया कि इसने टी शर्ट के नीचे से न तो ब्रा पहनी है, न कोई अंडरशर्ट पहनी है।

कुछ पल तो मैं उसको देखता रहा फिर जाकर दीवार से सट कर बैठ गया। पहले अपनी किताब खोली फिर उसके बीच सेक्सी कहानियों की किताब रखी और पढ़ने लगा।

अब जब कहानी सेक्सी हो तो कहानी पढ़ते पढ़ते लन्ड सहलाए बिना कहाँ मज़ा आता है, मैं पहले तो अपने पाजामे के ऊपर ऊपर से अपना लन्ड सहला रहा था, जब कहानी का मज़ा ज़्यादा आने लगा तो मैंने अपना पजामा थोड़ा सा नीचे खिसका लिया और लन्ड बाहर निकाल लिया और उसे हाथ में पकड़ के सहलाने लगा।
सहला क्या रहा था, मैं तो मुठ ही मार रहा था।

तभी मेरे कानो में आवाज़ पड़ी- क्या कर रहे हो?
मेरे तो तोते उड़ गए। मैंने पलट कर देखा, बिल्कुल मेरे पीछे, दीवार के दूसरी तरफ पड़ोसियों की लड़की खड़ी थी।
मैंने झट से अपना लन्ड पाजामे के अंदर किया और किताब बंद कर दी।
‘कुछ नहीं, मैं तो पढ़ रहा था।’ मैंने हकलाते हुये कहा।
‘पढ़ नहीं रहे थे तुम, मैंने देखा, तुम कोई और ही किताब पढ़ रहे थे और अपने उससे भी कुछ कर रहे थे।’ उसने अपनी उंगली से मेरे लन्ड की तरफ इशारा करते हुये कहा।

अब चोरी तो मेरी पकड़ी गई थी, मगर मैंने देखा उस लड़की के चेहरे पे कोई गुस्से के भाव नहीं थे, और लड़की भी अच्छी ख़ासी थी, मैंने रिस्क लेकर ट्राई मारने की सोची- यह बहुत ही बढ़िया कहानियों की किताब है, इसमें बहुत ही बढ़िया कहानियाँ हैं।’ मैंने कहा।
वो बोली- कैसी कहानियाँ हैं इसमें?
मैंने कहा- प्यार मोहब्बत की कहानियाँ हैं इसमें, तुम पढ़ना चाहोगी?
‘तुम मुझे दोगे ये किताब?’ उसने पूछा।
पहले तो मैंने किताब दे देने की सोची मगर फिर मैंने कहा- मैंने भी यह किताब अभी नहीं पढ़ी है, तुम चाहो तो मेरे साथ बैठ कर पढ़ सकती हो।

उसने मेरी तरफ देखा, मैंने कहा- डरो मत, दीवार फांद कर आ इधर आ जाओ।
उसने अपनी टांग उठाई, दीवार पे रखी और सच में ही दीवार फांद कर मेरी तरफ आ गई। मैं नीचे बैठ गया तो वो मेरे बाईं तरफ बिल्कुल मुझसे सट कर बैठ गई।

मैंने किताब का पहला पन्ना खोला और उसके साथ दोबारा से कहानी पढ़ने लगा।
मगर अब मेरा ध्यान किताब की कहानी में नहीं था, मैं तो उसका खुद से सट कर बैठना और उसके बदन से आने वाली सुगंध का आनन्द लेने लगा।
जब किताब के 2 पन्ने पढ़ लिए तो मैंने देखा कि उसकी टी शर्ट के नीचे जो संतरे जैसे उसके दो बूबू थे, उनके निप्पल सख्त होकर उसकी टी शर्ट में से चमकने लगे थे।
मैं कहानी पढ़नी छोड़ कर उसके बदन को ही देखे जा रहा था, मेरा दिल कर रहा था कि मैं उसके बूबू पकड़ कर दबा कर देखूँ, मगर किसी अंजान डर की वजह से मैं ऐसा नहीं कर पा रहा था।

कहानी पढ़ते वक़्त आधी किताब मैंने पकड़ रखी थी और आधी किताब उसने पकड़ी हुई थी, मेरा बायाँ हाथ खाली था तो मैं फिर से
पजामे के ऊपर से ही अपना लन्ड सहलाने लगा।
लन्ड तो मेरा पहले से ही तना पड़ा था, मैं तो सिर्फ उसको हिला रहा था, और वो भी कहानी पढ़ते पढ़ते बार बार मेरे लन्ड की तरफ देख रही थी।

मेरा गला सूख रहा था, मैंने थोड़ा सा थूक निगल के उसको पूछा- कैसी लगी कहानी?
वो बोली- ठीक है।
‘जब तुम कहानी पढ़ती हो तो तुम्हें कुछ होता है, वहाँ पे?’ मैंने अपनी उंगली से उसकी चूत की तरफ इशारा कर के पूछा।
वो बोली- हाँ, होता है।
मैंने पूछा- क्या होता है?
वो बोली- गीला गीला होता है।

मैंने कहा- जब गीला गीला होता है, तो क्या तुम उसे अपने हाथ से उसे छेड़ती हो?
वो बोली- हाँ छेड़ती हूँ, तुम भी छेड़ते हो?
मैंने कहा- मैं सिर्फ छेड़ता ही नहीं, मैं तो इसे सहलाता हूँ, प्यार करता हूँ।             “Mera Pahla Sex”
वो बोली- कैसे, जैसे अभी कर रहे थे?
‘हाँ’ मैंने कहा- क्या तुम भी अपनी उस से ऐसे ही प्यार करती हो?
‘नहीं’ वो बोली- मैंने ऐसे कभी करके नहीं देखा।
‘तो करके देखो!’ मैंने सलाह दी- बहुत मज़ा आता है।                                “Mera Pahla Sex”

मेरे कहने पे उसने अपने पाजामे के ऊपर से ही अपनी चूत को छुआ- इससे तो कोई मज़ा नहीं आ रहा!
उसने कहा।

‘अरे पागल ऐसे मज़ा नहीं आएगा, अपना हाथ अपने पाजामे के अंदर डालो!’
मेरे कहने पे उसने अपना हाथ अपने पाजामे के अंदर डाला- अब इसे छेड़ो।

जब वो मेरे कहे मुताबिक करने लगी तो मैंने भी अपना लन्ड अपने पाजामे से बाहर निकाल लिया और बाहर निकाल कर उसके सामने अपने लन्ड को सहलाने लगा।                                                          “Mera Pahla Sex”
किताब अब हम दोनों के हाथों से छूट कर नीचे गिर गई। मैंने किताब उठाई और खुद ही संभाल ली, अब मैं किताब में से बोल के पढ़ने लगा, ताकि उसको सुने और वो पूरे आराम के साथ अपने हाथ से कर सके।

मैंने कहा- अभी तो तुम कर रही हो न, अगर कोई दूसरा ऐसा करे तो और भी ज़्यादा मज़ा आता है।उसने मेरी तरफ देखा, मैंने पूछा- मैं करूँ?
उसने अपना हाथ अपने पाजामे से बाहर निकाल लिया। मैंने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पे रखा और बड़े आराम से सरका कर उसके पाजामे में डाल दिया।                                            “Mera Pahla Sex”

उसने नीचे से कोई पेंटी नहीं पहनी थी, पहले रेशमी झांट में मेरी उँगलियाँ लगी और उसके नीचे मुझे उसकी चूत के दो नर्म होंठ महसूस हुए।
जब मैंने उसकी चूत को छूआ तो उसने एक लंबी गहरी सांस ली। मैंने अपने हाथ की दो उँगलियों से उसकी चूत के दोनों होंठ अलग अलग किए और अपनी बीच वाली उंगली से उसकी चूत का दाना सहलाया तो उसके मुँह से दबी दबी सिसकियाँ निकल पड़ी।
‘मज़ा आया!’ मैंने पूछा, उसने हाँ में सर हिलाया।                              “Mera Pahla Sex”
‘जैसे मैं तुम्हें मज़ा दे रहा हूँ, तुम भी मुझे मज़ा दो।’ मैंने कहा तो उसने हल्के से हाथ से मेरा लन्ड पकड़ लिया।

मैंने अपने हाथ से उसको अपना लन्ड मजबूती से पकड़ना बताया और उसे ऊपर नीचे करना समझाया, वो वैसे ही करने लगी।

मज़ा तो आ रहा था मगर मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही थी, मैं उसे रोका- रुको, ऐसे नहीं, तुम मेरी दायीं तरफ आ कर बैठो, मेरा हाथ नहीं सही पड़ रहा।
वो उठ कर मेरी दायीं तरफ बैठ गई, मैंने अपना सीधा हाथ उसकी पीठ के पीछे से घुमा कर उसके पाजामे में डाल दिया और अपना लन्ड फिर से उसको पकड़ा दिया।                                              “Mera Pahla Sex”

अब मेरा बायाँ हाथ खाली था, सो मैं उसके संतरे जैसे गोल गोल बूबे दबा कर देखे, जो निप्पल से उसके टी शर्ट के ऊपर से चमक रहे थे। मैं उन्हें अपने अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ा और हल्के से मसल के देखा।
देखने वाली बात यह कि मैंने उसके बूबे दबाये तो मगर उसकी टी शर्ट के ऊपर ही से, जबकि मैं उसकी टी शर्ट के अंदर भी हाथ डाल सकता था, साली इतनी अकल ही नहीं थी।                                      “Mera Pahla Sex”

हम दोनों का ही यह पहला सेक्सुअल एक्सपीरियंस था, इसलिए हम दोनों कोई बात नहीं कर रहे थे।
मैं उसकी चूत के दाने को लगातार मसल रहा था, उसके चूत के पानी से मेरे हाथ की चारों ऊँगलियाँ भीग चुकी थी, वो कभी अपनी टाँगों को खोल देती, कभी भींच देती।
मगर यह बात पक्की थी कि उसको मज़ा बहुत आ रहा था।

मुझे तो उसको मज़ा देकर ज़्यादा मज़ा आ रहा था। मज़े मज़े में उसने पहले अपना सर मेरे कांधे पे रखा, फिर सीने पे, फिर पेट पे, वो नीचे ही नीचे झुकती जा रही थी। मैंने उसका सर थोड़ा और नीचे झुकाया तो मेरा लन्ड उसके होंठों को छू गया, मगर उसने चूसा नहीं।                                                                      “Mera Pahla Sex”

मेरे हाथ की हरकत बढ़ती जा रही थी, मेरे हाथ के साथ साथ उसकी टाँगों का हिलना भी बढ़ता जा रहा था।
मुझे लगा रहा था कि जैसे कुछ होने वाला है।
और फिर उसने अपना मुँह खोला और मेरे लन्ड को अपने मुँह में ले लिया।
अरे वाह, क्या मज़ा आया लन्ड चुसवाने का। उसने सिर्फ मुँह में लिया, उसे चूसा नहीं, मगर उस वक़्त तो मुझे यही लगा कि लन्ड ऐसे ही चूसते होंगे।                                                                         “Mera Pahla Sex”

लन्ड मुँह में लेने के आधे मिनट बाद ही वो अकड़ गई। मैं अपनी पूरी स्पीड से उसकी चूत के दाने को सहला रहा था।
वो तड़पी, ज़ोर ज़ोर से उसने अपने बदन को झटके दिये, मेरे सारे लन्ड को अपने मुँह में समा लिया।
कुछ देर ज़ोर ज़ोर से हिलने और तड़पने के बाद वो शांत हो गई, मेरा लन्ड भी उसने अपने मुँह से निकाल दिया और मेरा हाथ भी अपने पाजामे से निकाल दिया।                                                           “Mera Pahla Sex”

ये कहानी Chadhti Jaewani Ka Mera Pahla Sex Anubhav आपको कैसी लगी कमेंट करे………

1 thought on “Chadhti Jaewani Ka Mera Pahla Sex Anubhav – चढ़ती जवानी मेरा पहला सेक्स

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *