Didi Ko Nahla Kar Pela Bathroom Mein – दीदी को नहला कर पेला बाथरूम में

Didi Ko Nahla Kar Pela Bathroom Mein

मेरी बहन का नाम रागिनी है, उसकी उम्र 26 साल है, वो दिखने में एक बहुत सुंदर लगती है और अब उसकी शादी हो चुकी है। दोस्तों वैसे तो मेरी बहन पर मेरी बुरी नियत शुरू से ही थी, मेरा उस पर मन कैसे खराब हुआ? यह आज में आप भी को बताने जा रहा हूँ। दोस्तों उन दिनों में 12वीं क्लास में था, तो किसी कारण से उस दिन मेरे स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई और उस दिन में अपने घर जल्दी आ गया। फिर जब में अपने घर पहुँचा तब मैंने देखा कि मेरे पापा ऑफिस जा चुके थे और माँ भी घर में नहीं थी। Didi Ko Nahla Kar Pela Bathroom Mein.

फिर मैंने अपनी दीदी से पूछा कि माँ कहाँ है? तब दीदी मुझसे कहने लगी कि माँ पड़ोस में गई है, उनके यहाँ कोई पूजा है जिसकी वजह से वो देर से घर आएगी। फिर मैंने उनको कहा कि ठीक है और फिर में अपने कमरे में बैठकर पढ़ाई करने लगा था। दोस्तों हमारे घर में बाथरूम नहीं था और उन दिनों हम सभी लोग बाहर आंगन में हेडपंप के पास ही बैठकर नहाते थे। फिर जब माँ और दीदी नहाने जाती थी, तब वो कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद कर देती थी।

फिर जब में उस दिन पढ़ाई कर रहा था, तब दीदी मुझसे कहने लगी कि प्रतिक में नहाने जा रही हूँ, तुम पढ़ाई करो में तब तक दरवाज़ा बाहर से बंद कर देती हूँ। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है और फिर दीदी इतना मुझसे कहकर बाहर चली गई और उन्होंने मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया, लेकिन उस दिन गलती से कमरे का दरवाजा ठीक से बंद नहीं हुआ था। फिर उनके बंद करते ही दरवाज़ा थोड़ा सा खुल गया था, लेकिन उसके ऊपर दीदी ने ध्यान नहीं दिया। अब दीदी नहाने के लिए बैठ गई, तभी अचानक से मेरी नजर उन पर पड़ी तो मैंने देखा कि दीदी नहाने के लिए अपने कपड़े उतार रही है। अब में दीदी को देखकर एकदम चकित रह गया था और में अपनी चकित नजरों से लगातार उन्हें घूरकर देखता ही रहा। “Didi Ko Nahla Kar”

दोस्तों ज्यादातर समय दीदी घर में टॉप और स्कर्ट ही पहनती है। फिर मैंने दीदी को देखा, तो वो उस समय अपना टॉप उतार रही थी और अब मेरे देखते देखते उन्होंने अपनी स्कर्ट को भी उतार दिया था। अब उस वजह से दीदी सिर्फ ब्रा-पेंटी में थी, में तो दीदी को पहली बार उस हालत में देखता ही रह गया था और में बड़ा चकित था क्योंकि मैंने उनका वो रूप पहली बार देखा था। फिर दीदी ने कुछ देर बाद अपनी ब्रा-पेंटी को भी उतार दिया और नहाने लगी और वो पूरी तरह से नंगी होकर अब नहाने लगी थी और अपने बदन पर साबुन लगाते हुए अपने बूब्स को दबा रही थी।

अब में वो सब देखकर बड़ा ही गरम उत्तेजित हो गया, दीदी करीब दस मिनट तक वैसे ही अपने बदन को दबाकर रगड़ते हुए नहाती रही और में उनके नंगे बदन को घूरकर देखता रहा और फिर उसके बाद दीदी कपड़े पहनकर कमरे में आ गई। दोस्तों उस दिन वो द्रश्य देखने के बाद से मेरी नियत दीदी के लिए बड़ी खराब हो चुकी थी और फिर जब भी मुझे कोई अच्छा मौका मिलता, तब में उन्हें नंगा देखने की कोशिश करने लगा था। दोस्तों हमारे घर में बस दो ही कमरे है तो एक कमरे में मेरी माँ-पापा सोते थे और दूसरे कमरे में मेरी दीदी और में सोता था। अब मेरे कमरे में बड़ा पलंग होने की वजह से हम दोनों एक साथ ही उसी पर सोते थे। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर एक रात को मैंने सही मौका पाकर देर रात को सोते हुए दीदी के जिस्म से खेलना शुरू कर दिया, लेकिन उनकी तरफ से मुझे कोई भी हलचल महसूस नहीं हुई जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से भी ज्यादा अब बढ़ चुकी थी। अब जब भी वो रात में सोती थी, तब में मौका पाकर उनके बूब्स को दबाता और उसकी स्कर्ट के अंदर अपना एक हाथ डालकर उनकी पेंटी के ऊपर से ही दीदी की चूत से खेलने लगा था। फिर कुछ दिन जब कुछ नहीं हुआ तो मेरी हिम्मत अब ज्यादा ही बढ़ गई और में अपना हाथ उनके कपड़ो के अंदर डालने लगा था और उनके बूब्स और चूत से खेलने लगा था, लेकिन दीदी को कभी ना कभी तो पता चलना ही था। एक दिन में पकड़ा गया, में उस समय बहुत डर गया था और में अपनी दीदी के आगे बड़ा गिड़गिड़ाया उनको कहने लगा कि प्लीज दीदी आप माँ-पापा से कुछ भी मत कहना। अब वो मेरा कहा मान तो गई, लेकिन साथ में उन्होंने मुझे धमकी भी दे दी कि अगर अगली बार से मैंने ऐसा कुछ किया, तो वो मेरी कोई भी बात नहीं सुनेगी और माँ-पापा को मेरी सभी हरकतों के बारे में जरुर बता देगी। फिर मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है मुझे आपकी हर बात मंजूर है, ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा, लेकिन इस बार आप मेरी गलती को माफ कर दो। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर दिन ऐसे ही बीतने लगे थे, अब मैंने वो सब काम तो छोड़ दिए थे, लेकिन उनको चोदने की इच्छा तो मेरे मन अब भी थी और वो मेरे मन से बिना चुदाई किए नहीं जाने वाली थी। फिर जब वो 24 साल की हुई तब उनकी शादी हो गई और वो अपने ससुराल चली गई और फिर उसके बाद से ही मेरे अच्छे दिन शुरू हो गये। फिर शादी के बाद जब पहली बार दीदी मेरे घर आई, तब दीदी बहुत सुंदर लग रही थी। फिर रात को जब हम सोने गये, तब पता नहीं मेरे मन में क्या हुआ? मैंने फिर से उनके बदन को छूना शुरू किया।

अब वो उस साड़ी में ही सो रही थी, तब मेरा हाथ उनकी पतली गोरी चिकनी कमर पर चला गया। फिर उसी समय मैंने दीदी के मुँह से हल्की सी आह की आवाज सुनी और मुझे थोड़ा अजीब सा लगा, लेकिन फिर मेरी उससे आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हुई। फिर अगली सुबह मेरी कुछ जल्दी ही आंख खुल गई, तब मैंने पाया कि दीदी मुझसे चिपकी हुई थी और उनका पैर मेरे ऊपर था और उनकी साड़ी घुटनों तक ऊपर उठी हुई थी और उनका हाथ मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़े हुए था। “Didi Ko Nahla Kar”

अब मुझे यह सब देखकर बहुत अच्छा लगा, तब मैंने भी अपनी तरफ से थोड़ी बदमाशी करने का विचार बना लिया और फिर मैंने उनका हाथ पहले तो अपने लंड पर से हटा दिया और फिर मैंने अपनी पेंट को खोला और थोड़ी नीचे करके और अपना अंडरवियर भी थोड़ा सा नीचे सरका लिया जिसकी वजह से मेरा लंड अब बिल्कुल फ्री होकर आजाद हो गया था। फिर मैंने दीदी का हाथ अपने नंगे लंड पर रखा और धीरे-धीरे दीदी के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, तब मैंने देखा कि वो अंदर काले रंग की ब्रा पहने हुए थी। “Didi Ko Nahla Kar”

अब में वैसे ही लेटा रहा, जब थोड़ी देर के बाद दीदी की आँख खुली तब शायद वो एकदम चकित रह गई। फिर मैंने डर की वजह से अपनी आंख नहीं खोली, लेकिन मुझे इतना जरूर लगा था कि वो थोड़ी सी हड़बड़ा जरुर गई है। फिर मैंने कुछ देर बाद अपनी आँख थोड़ी सी खोली तब मैंने देखा कि दीदी अपने ब्लाउज के बटन बंद कर रही थी, मैंने फिर से अपनी आँख को बंद कर लिया। अब दीदी ने मेरे लंड को मेरे अंडरवियर में छुपाया और वो तुरंत उठकर कमरे से बाहर चली गई। दोस्तों हम हर रात को सोते समय अंदर से कमरे का दरवाजा बंद करके सोते है इस वजह से किसी को कुछ पता नहीं चला था।

फिर थोड़ी देर के बाद में भी उठा, लेकिन अब मुझे बहुत डर लग रहा था कि बाहर पता नहीं क्या हो रहा होगा? कहीं दीदी माँ से तो वो सभी बातें नहीं बोल देगी? फिर थोड़ी देर तक में वैसे ही बैठा सोचता रहा। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी मेरे लिए चाय लेकर मेरे कमरे में आ गई और उन्होंने मुझे चाय दे दी, वो मुझसे कुछ नहीं बोली थी, लेकिन उस समय वो बहुत शांत ना जाने किस सोचा विचारी में लगी हुई थी। अब मेरी तो हालत धीरे धीरे खराब हो रही थी और में चाय पीने के बाद अपने कमरे से बाहर आ गया, “Didi Ko Nahla Kar”

मैंने देखा कि पापा अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहे थे और माँ अपने कामों में लगी थी और दीदी भी शांत लगने की कोशिश कर रही थी, लेकिन शायद उसके दिमाग में वही सब घूम रहा था। फिर उन्होंने किसी से इस बात को नहीं कहा और वो दिन ऐसे ही निकल गया। फिर उस रात को जब हम सोने गये, तब दीदी अपनी उसी पुराने कपड़ो में थी जिसको वो शादी से पहले हमेशा पहना करती थी, वो टॉप-स्कर्ट में मेरे सामने थी। अब मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि चलो आज शायद बहुत दिनों के बाद मज़े करने का मौका मिलेगा। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर रात इसी तरह से गुज़रने लगी थी और थोड़ी देर के बाद में अचानक से उठा, दीदी ने मुझसे पूछा क्या हुआ? तब मैंने कहा कि कुछ नहीं, में जरा पेंट बदलकर अभी आता हूँ, में थोड़ा अजीब सा महसूस कर रहा हूँ। अब दीदी ने कहा कि रोज तो तुम ऐसे ही सोते हो, तो आज क्या समस्या है? मैंने कहा कि सुबह मेरे पैर में चोट लगी थी जिसकी वजह से थोड़ा सा कट लगा और पेंट की वजह से मुझे थोड़ा सा दर्द हो रहा है। फिर दीदी बोली कि हाँ ठीक है, तुम जाकर लुंगी पहन लो में उनकी वो बात सुनकर बड़ा खुश हो गया और तुरंत ही कपड़े बदलकर आ गया।

अब मैंने अपनी पेंट के साथ-साथ अपनी अंडरवियर को भी उतार दिया था और फिर हम दोनों सो गये। फिर रात में मैंने महसूस किया कि दीदी का हाथ एक मेरी लुंगी के ऊपर से ही मेरे लंड पर था, तब मैंने अपनी लुंगी को पूरी खोलकर अलग कर दिया और में नीचे से पूरा नंगा हो गया। अब मेरा लंड कुतुबमीनार की तरह खड़ा हो गया था, मैंने ऊपर भी कुछ नहीं पहना था और अब में पूरी तरह से नंगा था। फिर मैंने दीदी का एक हाथ अपने लंड पर रखा और उसके टॉप के बटन खोलने लगा। तभी दीदी थोड़ी हिली और मेरा लंड ज़ोर से पकड़ लिया उसके बाद वो मुझसे और भी ज्यादा चिपक गई अपने होंठ मेरे बहुत पास ले आई। “Didi Ko Nahla Kar”

दोस्तों उस समय में बहुत जोश में आकर गरम हो चुका था, लेकिन में फिर भी बहुत काबू कर रहा था, मैंने किसी तरह दीदी के टॉप का बटन खोल दिया। अब उस वजह से मेरे सामने उनकी ब्रा में कैद उनके वो गोलमटोल गोरे बूब्स तुरंत बाहर आ गए और उनके बूब्स ब्रा में बहुत मस्त लग रहे थे। फिर मैंने किसी तरह से उनका स्कर्ट ऊपर किया, जिसकी वजह से मुझे उनकी पेंटी दिखने लगी थी और में उसी हालत में सो गया। फिर सुबह मेरी आँख देर से खुली तब मैंने देखा कि दीदी जाग चुकी थी और कमरे से बाहर चली गई, उन्होंने कमरे का दरवाज़ा लगाया हुआ था और में नंगा ही सोया हुआ था। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर उस दिन भी कुछ नहीं हुआ और वो दिन भी ऐसे ही निकल गया और उस रात को जब में सोने आया, तब दीदी मुझे बड़ी ही अजीब सी नजरों से देख रही थी, शायद उन्हें शक हो गया था कि रात को वो सब में करता हूँ। फिर उस रात को मैंने कुछ नहीं करने की बात अपने मन में सोची, उस दिन भी में सिर्फ लुंगी में था और जैसा कि मैंने सोचा था कि दीदी सोने का नाटक करने लगी थी, लेकिन उस रात को मैंने कुछ नहीं किया, लेकिन में सारी रात सो भी नहीं सका था।

फिर किसी तरह से रात कट गई और अगली सुबह मुझे दीदी शांत लगी, शायद उन्हें शक था कि उनके साथ रात में वो सब में करता हूँ, जो अब उनके मन से दूर हो गया था। फिर उस दिन पापा के ऑफिस चले जाने के बाद माँ भी पड़ोस में चली गई और उस समय घर में मेरे और दीदी के अलावा और कोई नहीं था। अब दीदी ने मुझसे कहा कि प्रतिक तुम जाकर नहा लो, मैंने उनसे कहा कि दीदी अभी नहीं पहले आप नहा लो, उसके बाद में नहा लूँगा। तभी दीदी ने अचानक से मुझसे कहा कि ठीक है चलो, आज हम दोनों साथ में ही नहाते है। “Didi Ko Nahla Kar”

अब में उनके मुहं से यह बात सुनकर तो में बहुत चकित होने के साथ ही बड़ा खुश भी हुआ, लेकिन मैंने भाव खाते हुए उनसे कहा कि दीदी यह आप क्या बोल रही हो? आप मेरी दीदी हो, में आपके साथ कैसे नहा सकता हूँ? तभी दीदी कहने लगी क्यों? नहाने में क्या बुराई है? तब मैंने कहा कि कुछ नहीं। अब दीदी बोली कि देखो माँ आ जाएगी तो उनके आने से पहले चलो नहा लिया जाए, नहीं तो हमे यह मौका दोबारा नहीं मिलने वाला। फिर मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है चलो हम आज साथ में नहा ही लेते है। अब में और दीदी आंगन में हेडपंप के पास जाकर बैठ गये, दीदी ने मुझसे कहा कि तुम अपनी लुंगी को उतार दो। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर मैंने उनसे कहा कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना है, वो मुस्कुराने लगी और बोली कि जा अंदर जाकर अपनी अंडरवियर पहन ले। फिर में अंदर गया और अपनी अंडरवियर को पहनकर वापस आ गया और उस समय में दीदी के सामने सिर्फ अंडरवियर में ही था। फिर मैंने भी दीदी से कहा कि दीदी आप भी अपने कपड़े उतार दो, दीदी मुस्कुराते हुए बोली कि नहीं, में ऐसे ही नहाऊँगी। अब में उनको कुछ नहीं बोला, और हम दोनों नहाने लगे, दीदी अब मेरे ऊपर पानी डालकर मुझे साबुन लगाने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने भी उन पर पानी डाल दिया, तभी दीदी मेरे ऊपर बड़े ही प्यार से चिल्लाई, प्रतिक क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि अपनी दीदी से प्यार। अब दीदी के गीले होने की वजह से उनकी ब्रा मुझे साफ-साफ नजर आ रही थी। फिर उस दिन उससे ज्यादा कुछ नहीं हुआ, लेकिन उस रात को हमारी सुहागरात पूरी होने वाली थी, उस दिन हमारी किस्मत ने भी हमारा साथ दिया था। फिर शाम को पापा आए और बोले कि उन्हें ऑफिस के काम से हमारे शहर से कहीं बाहर जाना है और उसी समय मैंने कहा कि माँ आप भी पापा के साथ जाकर घूम आए। “Didi Ko Nahla Kar”

अब पापा मेरी वो बात मान गये, लेकिन माँ बोली कि तो घर पर कौन रहेगा? तब मैंने कहा कि में और दीदी है ना और बस 15 दिन की ही तो बात है, उसी में क्या हो जाएगा? आखरी में माँ भी मान गई और फिर माँ-पापा चले गये। फिर उस रात को जब दीदी और में सो रहे थे तब मैंने महसूस किया कि दीदी मेरे लंड से खेल रही है, मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर थोड़ी देर तक खेलने के बाद दीदी ने मेरी पेंट के अंदर अपना एक हाथ डाल दिया और वो मुझसे चिपक गई। अब मैंने भी अच्छा मौका देखकर अपने होंठ दीदी के होंठो से लगा दिए और में चूसने लगा। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर दीदी ने भी कुछ नहीं कहा और फिर हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे को प्यार करते रहे और करीब 15 मिनट तक हम एक दूसरे को पागलों की तरह चूमते रहे और फिर थोड़ी देर के बाद हम अलग हुए, तब हमने पहली बार एक दूसरे को देखा और बड़ी ज़ोर से हँसे। दोस्तों तब मैंने एक बार फिर से बड़ी ज़ोर से दीदी के होंठो को चूसा और उनसे कहा कि दीदी में आपको बहुत प्यार करता हूँ। तभी दीदी भी मुझसे बोली कि हाँ प्रतिक में भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। फिर दीदी मुझसे बोली कि प्रतिक तुम खुश तो हो ना?

अब मैंने कहा कि हाँ दीदी में बहुत खुश हूँ, लेकिन दीदी क्या में आपको? तो दीदी बोली कि बोलना पागल, शरमाता क्या है? तब मैंने कहा कि दीदी क्या में आपको एक बार नंगी देख सकता हूँ। अब दीदी ने मेरे होंठो पर एक मस्त जबरदस्त चुम्मा किया और वो बोली कि मेरे भाई आज हमारी सुहागरात शुरू होने वाली है, मुझे नंगा देखना तो क्या? तुम जितना जी चाहे मुझे चोदना, क्योंकि आज से तुम मेरे दूसरे पति हो, लेकिन तुम नहाकर तैयार हो जाओ में कुछ कपड़े देती हूँ तुम वो पहन लो और में भी थोड़ी देर में तैयार होकर अभी आती हूँ, लेकिन तब तक इंतजार करो।
“Didi Ko Nahla Kar”

फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, दीदी नहाने चली गई और नहाकर माँ के कमरे में घुस गई, में भी नहाकर कमरे में आया, देखा वहाँ कुर्ता पजामा रखा हुआ था, जिसको अब मैंने पहन लिया था। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी ने मुझे माँ के कमरे में पुकारा, फिर जब में वहाँ गया तब मैंने देखा कि दीदी दुल्हन बनकर पलंग पर बैठी हुई थी। फिर मैंने वो कमरा अंदर से बंद किया और में उनके पास चला गया, दीदी ने मुझे पीने के लिए एक दूध का गिलास दिया और वो मेरे कान में बोली कि आज में सिर्फ तुम्हारी हूँ, तुम मेरे साथ जो भी करना चाहो करो, में कुछ नहीं बोलूँगी।
“Didi Ko Nahla Kar”

अब में दीदी के पास बैठ गया और सबसे पहले उनके शरीर से सारे गहने निकालकर अलग कर दिए, उसके बाद मैंने उनकी साड़ी को भी उतार दिया और अब दीदी शरमाकर अपना सर झुकाकर खड़ी थी। फिर मैंने दीदी के शरीर से उनके ब्लाउज और पेटीकोट को अलग किया, जिसकी वजह से दीदी सिर्फ ब्रा-पेंटी में थी। अब दीदी ने कहा कि सिर्फ मेरे कपड़े ही खोलोगे, अपने भी तो उतारो, तब मैंने उनको कहा कि क्यों? तुम खुद ही निकाल लो। फिर दीदी ने मुझे भी नंगा किया और मैंने उनके बदन से बाकी बचे हुए कपड़े भी अलग कर दिए।

अब हम दोनों भाई-बहन बिल्कुल नंगे एक दूसरे के सामने खड़े थे, हम दोनों एक दूसरे से चिपक गये और अब हमारे सारे अंग एक दूसर से चिपके हुए थे हमारे होंठ छाती मेरा लंड और उनकी चूत सब कुछ। फिर थोड़ी देर तक चूमने के बाद हम अलग हुए और फिर मैंने दीदी को अपनी गोद में उठाया और पलंग पर लेटा दिया और में उनके बूब्स को चूसने लगा। अब दीदी सिसकियाँ लेने लगी थी वो आहह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ प्रतिक चूसो और ज़ोर से ऊफफफ्फ चूस भाई चूस ऊहह्ह्ह माँ। फिर करीब बीस मिनट तक उनके एक बूब्स को चूसने के बाद मैंने उनके दूसरे बूब्स पर अटैक किया और उसको भी बहुत मज़े से चूसा। “Didi Ko Nahla Kar”

फिर मेरा अगला निशाना मेरी दीदी की चूत बनी और मैंने जैसे ही अपने होंठ दीदी की रसीली चूत पर रखे तभी उसी समय दीदी चिल्ला उठी आहह्ह्ह। अब में उसको चाटने लगा था और उनकी चूत के अंदर अपनी जीभ को डालने लगा था, अब दीदी भी मेरा सर पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी थी और अपना सर इधर उधर पटक रही थी और चिल्ला रही थी आह्ह्ह हाँ चाट ऊह्ह्ह बहनचोद और ज़ोर से चाट बिल्कुल रंडी बना दे अपनी बहन को। फिर करीब बीस मिनट तक चाटने के बाद दीदी का अमृत निकल गया और मैंने जीवन में पहली बार यह अमृत पीया है और वो भी अपनी दीदी का। फिर दीदी बहुत खुश हुई और मुझे ऊपर खींचकर मेरे होंठो को चूसने लगी और बोली कि कैसा लगा अपनी बहन की चूत को चाटकर और उसका अमृत पीकर? “Didi Ko Nahla Kar”

मैंने कहा कि में यह अमृत रोज पीना चाहता हूँ। अब दीदी ने कहा कि हाँ-हाँ यह तुम्हारे लिए ही तो है, जब दिल करे इसको पी लेना। फिर दीदी ने मुझसे कहा कि अब तुम लेट जाओ मुझे भी आईसक्रीम खानी है, मैंने कहा कि हाँ-हाँ क्यों नहीं? फिर दीदी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। अब मैंने कहा कि आह्ह्ह चूसो और चूसो साली रंडी चूस इसको और चूस और फिर करीब 15-20 मिनट तक अपने लंड को चुसवाने के बाद मैंने कहा कि आह्ह्ह दीदी में आ रहा हूँ उह्ह्ह्ह और फिर मेरा भी अमृत दीदी के मुँह में ही निकल गया।

फिर जब मेरा अमृत इतना ज्यादा निकला था कि दीदी का मुँह पूरा भर गया और कुछ बाहर उनके बूब्स पर भी गिरा था, जिसको वो उठाकर पी गई थी। फिर हम एक दूसरे को चूमने लगे थे और करीब 25-30 मिनट तक हम ऐसे ही लेटे रहे, थोड़ी देर के बाद दीदी बोली कि चलो अब घोड़े दौड़ाने का वक़्त आ गया है। अब मैंने कहा कि हाँ मैदान भी गीला है, बड़ा मज़ा आएगा और फिर हम दोनों हँसने लगे थे। फिर में उठा और दीदी की चूत को निशाना बनाकर अपना लंड उसमें डालने लगा, दीदी की चूत बहुत टाईट थी। “Didi Ko Nahla Kar”

अब मुझे यह थोड़ा सा अजीब लगा, मैंने दीदी से कहा कि दीदी जीजाजी से चुदने के बाद भी तुम्हारी चूत इतनी टाईट कैसे है? तब दीदी ने बताया कि उनका लंड बहुत छोटा है और ठीक से अंदर भी नहीं जाता है, जिसकी वजह से अभी तक तो मेरी सील भी नहीं टूटी है और अब इसको तुम ही तोड़ो और वो भी जमकर। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है साली कुतिया देख अब यह कुत्ता क्या करता है? और फिर मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर रखकर एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया जिसकी वजह से मेरा आधा लंड अब उनकी चूत में जा चुका था। अब दीदी दर्द की वजह से चिल्ला उठी, तब मैंने अपने होंठ उनके होंठो पर रखे और फिर थोड़ी देर के बाद उनसे पूछा कि क्या हुआ? क्या में रुक जाऊं? “Didi Ko Nahla Kar”

अब मैंने देखा कि दीदी की चूत से खून आ रहा था, लेकिन तब भी उन्होंने मुझसे कहा कि हरामी मैंने रुकने को कहा क्या? चोद साले कुत्ते जैसे चाहे चोद। अब मैंने फिर से एक धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उनकी चूत में चला गया और अब दीदी आहहह ऊहहहहह कर रही थी। फिर मैंने धक्के देना शुरू किया और फिर में करीब बीस मिनट तक उन्हें वैसे ही धक्के देकर चोदता रहा। अब इस दौरान दीदी तीन बार झड़ चुकी थी, मैंने कहा कि दीदी में भी आ रहा हूँ, दीदी ने कहा कि अंदर ही निकाल दो, थोड़ी देर के बाद में भी उनकी चूत में ही झड़ गया।

अब जब में झड़ रहा था, तब दीदी मुझे ज़ोर से पकड़े हुए थी और बोली कि आह्ह्ह क्या मस्त एहसास है अपने भाई का अमृत लेने का? वाह मज़ा आ गया तुमने आज मुझे एक पूरी औरत बनने का सुख वो मज़ा आज पहली बार दिया है, जिसके लिए में कितनी और ना जाने कितने दिनों से तरस रही थी। दोस्तों इसी तरह से हमारे दिन निकलते चले गये और में उन्हें हर समय जब भी हमे मौका मिलता में उनकी चुदाई करने लगा था। “Didi Ko Nahla Kar”

अब में दीदी को रोजाना दिन में दो बार चोदता और हर बार वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देकर मेरे साथ बड़े मज़े करती फिर कुछ दिनों के बाद माँ-पापा आ गये, तब हम रात में चुदाई करते थे। फिर कुछ दिनों के बाद दीदी भी अपने ससुराल चली गई, एक महीने के बाद दीदी का फोन आया। अब वो मुझसे बोली कि प्रतिक तुम बाप बनने वाले हो और यह बात सुनकर में बहुत खुश हुआ। फिर कुछ महीने निकल जाने के बाद दीदी ने एक बेटी जो जन्म दिया, जो बिल्कुल मेरे जैसी है। फिर उसके बाद भी में और दीदी अक्सर चुदाई करते थे। अब दीदी दोबारा से गर्भवती है और यह भी मेरा ही बच्चा है। अब में दोबारा से बाप बनने का इंतज़ार कर रहा हूँ । “Didi Ko Nahla Kar”

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1 thought on “Didi Ko Nahla Kar Pela Bathroom Mein – दीदी को नहला कर पेला बाथरूम में

  1. Raman deep

    कोई लड़की भाभी आंटी तलाकशुदा ओर विधवा भाभी जिसकी चूट चुद्वाने की प्यासी हो ओर मोटे लिंग से चुदाना चाहती हो तो मुझे कॉल ओर व्हाट्सएप कर सकती हो 9115210419

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