Meri Pahli Chudai ki Sexy Kahani – मेरी पहली चुदाई की सेक्सी कहानी

Meri Pahli Chudai ki Sexy Kahani

दुनिया की लगभग सभी जातियों में, सभी समाज में जब लड़के, लड़की सेक्स करने लायक हो जाते हैं तो उनकी शादी कर दी जाती है और ये शादी बहुत ही खुशी, गाजे बाजे और उत्साह से एवं धूमधाम से की जाती है। Meri Pahli Chudai ki Sexy Kahani.

यह तो निर्विवाद रूप से मान लेना चाहिए कि सेक्स का मनुष्य जीवन में बहुत महत्व है। इस कारण इस सेक्स की शुरुआत इतनी भव्यता से की जाती है।

मनुष्य जीवन क्या, अपितु इस संसार के सभी जीवों के लिए यह जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भगवान् ने इसको बनाया भी बहुत ही आनंद दायक है।

इसलिए सेक्स को हमेशा बहुत ही आरामदायक स्थिति में, प्रसन्न रहते हुए और मन व शरीर को सम्पूर्ण रूप से समर्पित करते हुए एवं पूर्ण समय देते हुए करना चाहिए।

यह सामर्थ्यवान है इसलिए सर पर चढ़ कर बोलता है, दिल और दिमाग को अति शीघ्र काबू में कर लेता है और सारे शरीर को तरंगित कर देता है।

यह शक्तिवान है इसलिए यदि यह अपूर्ण रह जाए तो मन को विक्षोभ से भर देता है और मन सारी वर्जनाएं तोड़ने को उतारू हो जाता है।

यह हर बार नयेपन का अहसास देता है, इसलिए इसको करने का बार बार मन करता है।

क्योंकि यह अति आनंद दायक है इसलिए सारी वर्जनायें टूट गई हैं, अब शादी के बाद ही सेक्स करना है – यह वर्जना टूटती जा रही है।

जिस किसी को सेक्स का अनुभव मिल सकता है वो कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता है।

यह इतना विस्तृत है कि सेक्स को करने के इतने तरीके है कि कोई पूरा नहीं कर सकता।

और इतना गूढ़ कि कोई यह नहीं कह सकता कि मैं इसका पूर्ण रूप से एक्सपर्ट हूँ।

इस कारण से ही सेक्स ने दुनिया में तहलका मचा रखा है।

इस दो इंच के खड्डे में पूरी दुनिया है।

इसको नमन, आख़िर ये ही हमारी जन्मस्थली भी तो है।

इस सेक्स पर कितने ही ग्रन्थ लिखे जा चुके हैं। जो इस के बारे में जानते हैं वो भी और जो नहीं जानते है वो भी, जो कुछ इस के बारे में लिखा जाए सब कुछ पढ़ने को तैयार रहते हैं।

तो लीजिये प्रकृति की इस महान कृति पर एक और रचना। आशा है आपको यह पसंद आएगी।

बात आज से लगभग २५ साल पुरानी है जब मेरी उम्र अट्ठारह साल रही होगी और मैं उस समय १२ वीं में पढ़ता था। मेरे पास साइंस थी इसलिए शरीर विज्ञान में रूचि भी बहुत थी, ख़ास तौर से लड़कियों के बारे मैं जानने की उत्सुकता बहुत ही ज्यादा थी।

पता नहीं क्यों लेकिन मुझको बचपन से लड़कियों से बात तक करने में बहुत डर लगता था। आज भी किसी लड़की से सीधे सीधे सेक्स के बारे में बात करनी हो तो मेरी गांड लुप लुप करने लगती है। जबरदस्ती करना तो बहुत दूर की बात है।

हमारे मकान की पहली मंजिल को किराये पर दिया हुआ था। और आंटी जी की उम्र लगभग ३३ साल की होगी। वो मेरे कंधे तक आती थी लेकिन शारीरिक गठन के कारण से मुझको बहुत आकर्षण महसूस होता था और इच्छा होती थी कि उनके साथ मैं सेक्स करू। लेकिन हिम्मत नहीं होती थी। हमारे मकान में सड़क वाली साइड में चारदीवारी के अन्दर बगीचा था।

एक दिन उन दोनों पति पत्नी को कहीं जाना था, सुबह लगभग १० बजे तैयार होकर वो अंकल से पहले नीचे आ गई। उन्होंने नहाने के बाद तैयार होते समय गर्दन से बोबों तक पाउडर लगा रखा था। जो दिख भी बहुत गहरा रहा था। तो मैंने आंटी जी को कह दिया कि आंटी जी इतना पाउडर लगा रखा है। तो उन्होंने मुझसे कहा कि तू ठीक कर दे। अब मेरे होश गुम होने की बारी थी और डर ये लग रहा था कि मेरे घर से किसी ने देख लिया तो मेरी खैर नहीं। सो मैं चुप हो गया।

हमारे मकान के दाईं साइड वाला मकान बना नहीं था। खाली जमीन ही पड़ी थी और मालिक कभी आकर देखता ही नहीं था। हम ही लगभग १० साल से तो उसको खाली ही देख रहे थे। उसमें हम हमारे घर का कचरा भी डाल देते थे। और बरसात में झाड़ झंखाड़ भी बहुत उग आए थे। एक दिन देखा कि उस जमीन में एक मियां बीवी झाडों की सफाई कर रहे हैं और एक घोड़ा-ठेली उनके गेट के पास खड़ी है। पता चला कि वो दूध वाले हैं और उन्होंने किराए पर लिया है। किराए पर लेने से पहले इन लोगों ने मालिक से कह कर बिजली पानी के कनेक्शन चालू करवा लिए थे। उस जमीन के बाद में जो अगला मकान था,

उसकी बगल में २ छोटे छोटे झोपड़ी नुमा कमरे इस जमीन पर बने हुए थे और एक हौज जमीन पर बाहर की चारदीवारी के पास उन कमरों के बाद बना हुआ था। उसमे उन लोगों ने पानी भरा और दो दिन लगा कर सारी जमीन साफ़ कर दी। एक कमरे में रसोई बना ली और दूसरे को सोने के काम लेने लगे। फ़िर दो चार दिन बाद २ भैंसे और एक भैंसा ले आए। दूध वाले की औरत का नाम राधा था और वो सुंदर भी खूब थी। कमर लगभग २५ इंच। छरहरी और मेहनती। अब उसके पास आकर रहने से मन उस पर भी डोलने लगा।                                                “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

जब भी जोर से सेक्स करने की इच्छा होती तो टॉयलेट में जाकर आंटी जी या राधा के सपने देखकर मुठ मारता।

अब एक और मुश्किल हो गई कि राधा के यहाँ जो भैंसा रखा गया था, अकसर आसपास से डेरी वाले अपनी भैंसे ला ला कर उनके भैंसे से चुदवा कर ले जाते थे। अनेकों बार जब स्कूल की। छुट्टी के बाद मैं घर पर होता तो जब भी ऐसा होता तो मैं कोमन बाउंड्री के पास, गैरेज के बाहर खड़े होकर देखा करता और भैंसे की किस्मत से इर्ष्या करता के मुझसे तो यही अच्छा, रोज रोज नई भैंस चोदने को मिल जाती है।

भैंसे का लंड दूधवाला अपने हाथों से पकड़ कर भैंस की चूत में डालता था। और कभी जब दूधवाला नहीं होता तो राधा ये काम करती थी और फ़िर मुझको टॉयलेट में लंड को शांत करना पड़ता।
दूधवाला अक्सर चारे और कुछ और काम से अपने गाँव भी जाता रहता था तब राधा घर में अकेली होती थी।

ये गैरेज ही उन दिनों मैंने खुद के रहने और पढने के लिए चुन रखा था।

एक दिन आंटी जी ने मुझको आवाज देकर ऊपर आने को कहा, मैं उनके पास गया तो मुझसे बोली कि तू पड़ोस में क्या देखता रहता है। मुझसे कोई जवाब नहीं बन पडा। मैं बोला कुछ नहीं यूँ ही खड़ा रहता हूँ।

कुछ दिन निकल गए। मार्च की बात है। मैं अकेला सुबह १० बजे मेरे बगीचे में खड़ा था। अचानक ही नजर राधा के टैंक की तरफ़ गई तो धड़कन मेरे गले में बजने लगी, राधा ऊपर से बिना ब्लाउज बिना ब्रा के सिर्फ़ घाघरे में टैंक से लोटे से पानी ले कर नहा रही थी। मेरी नजरों ने आज तक ऐसा नजारा नहीं देखा था। मैंने चोर नजरों से फ़टाफ़ट मेरे घर और आसपास देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है ओर मेरी नजरें राधा के चिपक गई,

राधा ने बिना मेरी ओर देखे नहाना जारी रखा। उसके जैसे बोबे तो मैंने आज तक कभी नहीं देखे। क्रिकेट की बॉल से जरा ही बड़े बिल्कुल गुम्बद की तरह गोल और तने हुए खड़े। दोनों पहाडों के बीच में तीन इंच के लगभग घाटी। मुझको मेरी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। राधा ने बिल्कुल आराम से अपना काम निबटाया और ऊपर चोली पहनी और सूखा घाघरा गले से डालते हुए नीचे का गीला घाघरा खोल के गले से डाला हुआ घाघरा नीचे कर के बाँध लिया और अपने कमरे में चली गई।                                                                                                 “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मेरी हालत – लंड अकड़ कर सात इंच के डंडे में बदल चुका था। मुझको इस घटना के तुंरत बाद टॉयलेट जाना पड़ा और बहुत मुश्किल से उसकी अकड़न शांत हो पाई।

फ़िर दो चार दिन बाद ही मेरी दीदी की चिट्ठी आई थी उस को पढ़ रहा था कि आंटी जी भी आ गई और मेरी दांई बाजू की ओर खड़े होकर चिट्ठी देखने लगी फ़िर उन्होंने अपना हाथ मेरी बांह में दे कर मेरी कोहनी अपने बोबे से सटा ली। बोबों की नरमी और गर्मी से मेरे शरीर में झुरझुरी छूट गई और जो करेंट लगा तो लंड ने एक ही उछाल में ओलिम्पिक के सारे रिकोर्ड तोड़ दिए। मुझको लगा कि मैं भट्टी पर बैठ गया हूँ।

चिट्ठी के ख़त्म होने पर माँ ने आवाज लगाई तो आंटी जी मुझसे दूर हुई। आँटीजी के अलग होने पर मुझे तुंरत टॉयलेट जाना पड़ा, मेरे छोटे मुन्ने को शांत करने के लिए। माँ का बताया काम करके मैं ऊपर आंटी जी के पास गया भी और उनके पास खड़े होकर कुछ देर बात भी की। लेकिन उनको हाथ लगाने कि हिम्मत फ़िर भी नहीं हुई।

मैं बहुत चाहता था कि इन दोनों से या किसी एक से मेरे शारीरिक सम्बन्ध बन जाएँ तो मजे ही मजे हो जाएँ। लेकिन बहुत हिम्मत करने पर भी उनको ऊँगली तक लगाने की हिम्मत नहीं होती थी। ये जानते हुए भी कि वो राजी हो जाएँगी मेरी हिम्मत फिर भी नहीं होती थी।

फिर एक बार आँटीजी के पास खड़ा था कि उन्होंने मुझको कहा- आ ! तेरे को एक चीज दिखाऊं !

फिर उन्होंने मुझे अपने पापा की बनाई हुई दही मथने की मथनी दिखाई, और उसको चला कर दिखाते हुए उनका पल्लू नीचे सरक गया जिसको उन्होंने ठीक नहीं किया, अब उनके ब्लाउज में से उनके भरे हुए बोबे अपना जलवा दिखा रहे थे लेकिन फिर बात वो ही हुई कि मैंने अपने आपको जाने कैसे कंट्रोल किया, मेरी हिम्मत एक ऊँगली तक लगाने की नहीं हुई। अब वो खुद तो अपने कपड़े खोल कर मुझसे बोलने से रही कि आ मुझे चोद दे। इस दुनिया की साधारण रीत तो ये ही है कि लड़का पहल करे सेक्स के लिए। और अक्सर देखने में ये आता है, कि एक बार हिम्मत कर लो तो कामयाबी मिल ही जाती है। लेकिन हिम्मत ही तो नहीं होती है।                                                    “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

इस बात को लगभग दो हफ्ते बीत गए, आंटीजी और राधा अक्सर आपस में बातें किया करते थे, जैसा कि आमतौर पर औरतों में होता है।

एक दिन राधा ने अचानक से मां को बोला कि आज लालाजी (राजस्थान में देवर को लालाजी से संबोधित किया जाता है) को शाम को खाना मैं खिलाउंगी क्योंकि ये (उसके पति) तो बाहर गया, और मैंने आज मनौती मानी है (मुझे बाद में पता चला कि उसके बच्चे नहीं हुए तो मनौती मानी थी) । मां ने साधारण तौर से हाँ कर दी।

तो राधा ने शाम को मुझे खेलते देख बोला कि लालाजी आज खाना मेरे यहाँ खा लेना, मैं मां को बोल चुकी हूं, बोलो, क्या सब्जी बनाऊं। मुझे आलू की सूखी सब्जी और दाल अच्छी लगती है सो मैंने बता दिया तो राधा ने बोला कि ठीक है, तुम आठ बजे खाना खाने आ जाना। वो समय था जब हमारी कालोनी निर्माण के दौर से गुजर रही थी। इसलिए ज्यादा आबादी नहीं थी। कई मकान बिना बने ही जमीन के रूप में पड़े थे।

रात को आठ बजे मैंने राधा को आवाज लगाईं – भाभी………

तो राधा ने मुझको कहा- लालाजी, रसोई में आ जाओ।                            “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मैं रसोई में चला गया, वो चुनरी पहने हुई थी। जैसा कि राजस्थान में रिवाज है कि पूजा के टाइम चुनरी ओढ़ते हैं। मुझको आसन पर बिठाया, और बहुत ही मनोयोग से थाली सजा कर मेरे सामने रखी।

थाली में मेरी पसंद की दोनों सब्जी-दाल, अच्छे से छौंक कर बनाई हुई, एकदम गरम करारी फूली हुई चपाती – खूब घी से तर, और बर्फी थी। खाना खाया तो मजा आ गया, बहुत ही मन लगा कर बनाया हुआ खाना था। खाना खिला कर मेरी थाली उठा कर उसने खुद उसमें खाना खाया। मैं बहुत आश्चर्य से उसे देखने लगा, लेकिन वो इत्मीनान से खाना खा रही थी। खैर, खाना खा चुकी तो उठी, मुझे नमस्ते की और बोली – लालाजी अब तुम साढ़े नौ बजे दूध पीने आ जाना तो मेरी मनौती पूरी हो जायेगी।

मैंने सोचा कि मानी होगी कोई मनौती। तो मैंने हाँ कर दी। मैं रात को गैरेज में सोता था। इसलिए मुझको कोई ज्यादा परवाह भी नहीं थी कि रात को आने में कोई परेशानी होनी है। आबादी कम थी और टीवी उन दिनों होते नहीं थे, इसलिए अक्सर ही नौ-साढ़े नौ सोने का समय होता था।                                                   “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

रात को जब मुझे पढ़ते में ध्यान आया तो साढे नौ बज भी चुके थे, तो मैंने गैरेज से निकल कर कुण्डी लगाईं, और दीवार फांद कर उसके कमरे के बाहर हौले से आवाज लगाईं – भाभी… तो राधा ने कमरे का दरवाजा खोला और मुझे बोली आओ लालाजी, मैं अन्दर गया तो देखा उस आठ गुना दस के छोटे कमरे में एक और खाट लगा रखी थी। फिर बीच में दरवाजा और दूसरी और एक छोटी सी मेज थी। जिस पर कुछ सामान रखा था। खाट के पास तिपाई पर एक गिलास कटोरी से ढका हुआ रखा था। और दूसरी तिपाई पर टेबल फैन। ये ही थी उसकी छोटी सी लेकिन बहुत बड़ी दुनिया।

मेरे अन्दर आते ही राधा ने दरवाजा ढुका दिया मैंने कोई विशेष ध्यान नहीं दिया और खाट की ओर इशारा करके बोली- बैठो लालाजी।

मैं खाट पर बैठ गया। राधा तिपाई की ओर गई तो मैंने सोचा दूध का गिलास उठाती होगी। फिर वो मेरी और घूमी और बोली- लो लालाजी आज तक ऐसा दूध कभी नहीं पिया होगा।

वो देखते ही मैं तो हक्का बक्का रह गया। राधा की चोली खुली हुई थी और उसमें से उसके शानदार बोबे निकले हुए थे जिसमें से एक के नीचे उसने एक हाथ लगा रखा था, सीधे मेरे मुँह के सामने वो बोबा कर के मेरा मुँह दूसरे हाथ से सीधा करके मेरे मुँह में दे दिया। मैं इतना हकबका गया था, कि कुछ देर तक तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है और मुझको अब क्या करना चाहिए। राधा ने अपना बैलेंस बनाने के लिए अपना एक पैर मेरे पैर से सटा हुआ जमीन पर और दूसरा पैर मेरे शरीर के बाजू में रख दिया। मैं उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया।

राधा का दूसरा हाथ मेरे सर के पीछे आ गया और जो हाथ उसने अपने बोबे के नीचे लगा रखा था उस से मेरे गालों को बहुत प्यार से हौले हौले सहलाने लगी, और बोली, मेरे प्यारे लालाजी दूध पीना शुरू करो, देखो तो कितने प्यार से गरम किया है। खूब मलाई मारी है इसमें।                                                       “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

जिस के लिए मैं तरस रहा था वो सब मेरे साथ हो रहा था और मैं होश में नहीं था। मुझे गुमान भी नहीं था कि ये सब इस तरह से होगा और मेरी झोली में आ गिरेगा।

धीरे धीरे मैं संभला। राधा का जो पैर जमीन पर था। उस का घाघरा घुटनों तक चढ़ गया था, क्योंकि दूसरा पैर खाट पर था। मैंने अपना मुँह खोला और उसके बोबे की निप्पल मुँह में लेकर दूध पीने लगा। राधा के मुँह से सिसकारी निकलने लगी, वो बड़बड़ाने लगी- पीओ लालाजी पीओ ! जी भर के पीओ ! ये दूध बहुत दिनों से तुम्हारे लिए ही गरम कर के रखा है। ……………. आआआआआह….

आज मेरी आँखों के सामने उसके नहाने का सीन घूम रहा था, मैंने धीरे धीरे अपने हाथ उठाये और राधा का दूसरा बोबा अपने एक हाथ में पकड़ा जिसे छूने की हसरत बहुत दिनों से थी। और अपना दूसरा हाथ उसकी कमर में डाल दिया। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना के मारे थरथरा रहा था। फिर मैं अपने को संभाल नहीं सका और मेरा धड़ धीरे धीरे खाट पर पसरने लगा और राधा को अपने ऊपर लिए दिए मैं खाट पर पसर गया।                             “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मेरा मुँह राधा के बोबों में दब गया और मेरी सांस घुटने लगी तो मैंने अपना मुँह खोल के सांस ली, राधा अच्छी तरह से जान चुकी थी कि मैं सेक्स के मामले में निरा भोन्दू हूँ। इसलिए शर्म को उसने पूरी तरह से त्याग दिया वो अपने हाथो पर जोर डाल कर घुटने मोड़े मेरे लंड पर बैठ गई और खुद का घाघरा ऊँचा कर लिया फिर थोड़ा ऊँचा होकर, थोड़ा इधर उधर होकर मेरे पायजामे का नाडा खींच कर खोल दिया,                                      “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

फिर अंडरविअर में हाथ डाल कर लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लिया, और मेरे कपडे थोड़ा सा नीचे सरका दिए। फिर अपने मुँह से थोड़ी सी लार निकाली और हाथ में लेकर मेरे लंड के सुपारे पर पोत दी। फिर लंड को खुद की चूत के मुँह पर रखकर मुझ पर पसरती चली गई।

मेरे लंड में मीठी मीठी टीस उठने लगी, जो इतने मजे में मैंने आराम से बर्दाश्त की। उसकी चूत बुरी तरह से गीली हो चुकी थी। और उसकी जांघो तक से पानी टपक कर मेरे लंड के आसपास गिर रहा था, मैंने कहा- भाभी ! सु सु निकल रहा है शायद !                                                                                 “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

तो राधा बोली- मेरे भोले बालम, मेरे प्यारे देवर, यह चूत का रस है, इससे ही तुम्हारा छोटा मेरे अन्दर घुसा जा रहा है !

वो धीरे धीरे हिल कर पूरा लंड अन्दर ले गई, मेरा लंड अन्दर जाकर कहीं अड़ गया, तो उसके मुँह से जोर की सिसकारी निकली। मैं डर गया कि शायद दर्द हुआ होगा। तो राधा ने मेरा चेहरा देख कर बोला कि देवर जी डरो मत ना, तुम्हारा छोटा मेरे बच्चेदानी के मुँह पर लगा है, और मुझको बहुत आनंद मिला है। फिर उसने मेरे मुँह से खुद का मुँह जोड़ लिया और मेरे होंट और जीभ चूसने लगी।                                                               “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

अब मैं भी ताव में आने लगा था, मैंने अपनी बाहें उसके पीठ पर बाँध ली और उसको कस लिया उसके होंट ढीले पड़े और मुँह से आह निकली। मैंने आव देखा न ताव उसके मुँह पर जगह जगह से पप्पी ली, चूसा फिर उसके होंट अपने होंट में लेकर जोर जोर से चूसने लगा। वो मुझे देख कर मुस्कुराई और आँख मार कर अपने कूल्हे चलाने लगी, कोई २०-२५ बार में वो अकड़ी और फिर ढीली पड़ गई और मुझसे बोली- देवर जी अब ज़रा सा रुक जाओ।

मुझे पहली बार पता चला कि औरत को भी चुदने में आनंद मिलता है, वो भी झड़ती है।

फिर मुझसे रहा नहीं गया तो उसके तने हुए बोबे दबाता रहा। ज़रा सी देर में वो फिर गर्मी में आने लगी, और एक और को खिसक कर खाट पर मेरी करवट में आ गई और बोली- लाला अब तुम ऊपर आओ मेरा गीला छेद ढूंढो और अपना छोटा घुसा कर खुद का काम करो, और मेरा भी।                                                         “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मुझे समझ नहीं आया कि उसका काम कैसे करना है, लेकिन मैं कुछ नहीं बोला, सोचा कि जरूरत पड़ी तो बाद में बोलूंगा और राधा पर चढ़ गया, उसका छेद ढूंढ कर लंड को लगाया और सोच ही रहा था कि इसको अन्दर डालने के लिए क्या करूँ तो राधा ने नीचे से खुद के कूल्हे ऊपर उठा लिए और लंड अपने रास्ते चला गया। गहरे अन्दर तक, वो फिर सी सी करने लगी, और मैं चालू हो गया,                                                                       “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

धक्के पर धक्के, जोर से फिर और भी जोर जोर से………… अचानक फिर राधा अकड़ी और ढीली पड़ गई, मैं चालू ही रहा फिर मेरे मुँह से आ आ, निकलने लगा तो राधा चौकन्नी हो गई, उसने अपनी टाँगे मेरी कमर पर लपेट ली और बोली- पूरा दम लगा कर धक्के मारो और जब माल निकले तो पूरी ताकत से दबा कर उसे मेरे अन्दर डाल दो।                                                                   “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मैंने ऐसा ही किया। हम दोनों पसीना पसीना हो चुके थे। फिर अचानक ही मुझे याद आया कि मैं कहाँ हूँ, पता नहीं तो किसी ने देखा होगा, या गैरेज में झांक ले, मुझे ना पाकर, मुझको ही कोई इधर उधर देखता हो…………..

मुझे घबराहट होने लगी, राधा बोली- देवर जी घबराओ मत ना, मैं हूँ ना, मैं कुछ भी बोल दूँगी, सब संभाल लूंगी।

फिर आले में रखी प्लेट लेकर मेरे सामने की, ढेर सी मलाई थी, उस में मिश्री डाली हुई थी, मैं ने एक बार खाई, फिर राधा के न न करते हुए भी उसको भी खिलाई, और मैंने भी खाई, फिर उसने गिलास उठा कर मेरे मुँह से लगा दिया, फिर खड़ी होकर मुझे ठीक से बिठाया और पैर छूकर बोली, देवर जी मुझे वरदान दो कि मेरी मनौती पूरी हो, मुझे बहुत शर्म आई लेकिन मेरे मुँह से निकल पड़ा- ऐसा ही हो।                               “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

राधा ने मेरे होंटो का चुम्बन लिया और दरवाजा खोल कर बाहर झाँका फिर मुझसे बोली – अच्छा होता कि तुम आज यहाँ ही सोते, लेकिन ज्यादा अच्छा है कि तुम खुद के कमरे में ही सोवो। किसी को शक नहीं होगा।

मैं चोर कदमों से गैरेज में आकर दरवाजा बंद कर के पलंग पर लेट गया, नींद का दूर दूर तक नाम भी न था। राधा के शरीर की खुशबू, उसकी गर्मी, उसकी नरमी के अहसास, उसके बोबे और अंग प्रत्यंग मेरी आँखों के सामने घूमते रहे, मेरा लंड अकड़ा ही रहा, जाने उस रात मैंने कितनी बार मुठ मारी लेकिन लंड ने नहीं बैठना था और वो नहीं बैठा। मेरा मन भरा ही नहीं था, औरत के शरीर को नापने देखने की हसरत मन की मन में थी, बस चुदाई पूरी हो गई थी।

मेरी मां सुबह साढ़े चार बजे उठ जाती है, और पास की जमीन से भी पॉँच बजे खटर पटर होने लगी, भैंसों की सार संभाल शुरू हो चुकी थी, मेरी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं पड़ रही थी, फिर भी जैसे तैसे करके छः बजे मैं उठा, भारी हाथों से दरवाजा खोला कि सामने राधा नजर आई। मेरी तो हिम्मत नहीं थी उससे नजरें मिलाने की, राधा हौले से मुस्कुराई, फिर अपने काम में लग गई।                                                                        “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मुझमे थोड़ी हिम्मत आई, फिर मैं लैट्रीन, ब्रश आदि से फारिग होकर बाहर दालान में आया तो ऊपर आंटीजी नजर आई जो राधा की और देख रही थी, जैसे ही राधा और आंटीजी की नजरें मिली, आंटीजी ने “क्या हुआ?” के रूप में गर्दन और आँखों की भोएं उठाई, राधा ने गर्दन को “हाँ” के रूप में हिला दी। ये सब रोज का सा काम था। मैंने कोई ध्यान नहीं दिया। अब मुझमे आम रोज की तरह का अहसास होने लगा था। बस रात का अहसास मन को गुदगुदा रहा था।

१० से थोड़ा पहले पिताजी और ऊपर वाले अंकल जी ऑफिस चले गए, मैं मां से कह ही रहा था, कि टंकी का पानी गर्म आने लगा है, अब पानी बाल्टी में भरकर थोड़ी देर रखना पड़ेगा। कि ऊपर से आंटीजी की आवाज आई – मुन्ना, ऊपर आकर नहा ले, यहाँ बाल्टी गुसलखाने में रखी है। मैं कपड़े लेकर ऊपर नहाने चला गया, तो आंटीजी बोली- जल्दी से नहा, फिर अपन नाश्ता करें !                                                              “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मैंने सोचा कि नेकी और पूछ पूछ। जल्दी से नहाया – ठंडे पानी से मजा आ गया।

सारी रात नहीं सोने के कारण भूख बहुत जोरों से लगी थी, इसलिए मुझे नाश्ते की जोरो से याद आ रही थी, फ़टाफ़ट कपड़े डाले और बाहर निकल कर आंटीजी से बोला तो उन्होंने नाश्ता प्लेट में लगाया और गोल छोटी मेज को पलंग के पास सरकाकर मुझको बैठने को कहा और खुद भी मेरे पास बैठ गई, हम दोनों नाश्ता करने लगे गर्म पोहे और जलेबी।

अचानक ही आंटीजी ने पूछा- दूध पिएगा?                                  “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मैं चौंक गया, तो आंटी जी बोली- राधा के जैसा तो नहीं है लेकिन फिर भी अच्छा है………….

मेरी आँखों के सामने इनके और राधा की गर्दन के इशारे घूम गए,

फिर तो एक और बार कमरे का दरवाजा बंद हुआ, और एक मिनट में ही हम दोनों नंगधडंग होकर एक दूसरे से लिपट गए। दूसरा ही नाश्ता शुरू हो गया, आंटीजी के भरे हुए नरम बोबों का स्वाद भी कोई कम तो नहीं था। लेकिन हाँ राधा के जवान शरीर की गर्मी और कसावट मुझे याद आने लगी। हम दोनों ही बेताब होकर एक दूसरे को चूमने लगे, चूसने लगे, होंटो से होंट मिले फिर जीभे चूसी,                                                “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

फिर मैं उनके बोबे पीने लगा, वो ऊपर आ गई, जो कुछ रात को मैं नहीं देख पाया था अब सब कुछ स्पष्ट दिख रहा था, एक स्त्री का पूरा शरीर कैसा होता है, पूरा अहसास मेरे मन को तरंगित किये हुए था। मैंने उनके पूरे शरीर को सहलाया, कौन सा हिस्सा क्या अहसास देता है ये जाना, उसकी गर्मी नरमी जानी, रात का भौचाक्कापन कहीं पीछे छूट गया, और मैं बेशर्म होकर आंटीजी के पूरे शरीर को निहार रहा था, परख रहा था।

मैंने उनकी टाँगे चौड़ी करके उनकी चूत भी ठीक से देखी, लंड की अकड़न तो बस…………….

आंटीजी मेरे लंड से खेलती रही, मुझे जगह जगह से चूमती रही, फिर उन्होंने मुझे पलंग पर सीधा कर दिया और मुझ पर चढ़ कर मेरा लंड अपने चूत पर अड़ा कर धीरे धीरे कूल्हे पर दबाव डाल कर अन्दर लेती चली गई, मैंने भी नीचे से धीरे धीरे धक्के लगाए, लंड में मीठा मीठा दर्द था, बेचारा सारी रात परेशान रहा था और अब भी उसकी परेशानी का अंत नहीं हो रहा था।                                                                                     “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

मुझे एक लोकोक्ति याद आ गई कि ज्यादा अकड़ेगा तो मार खायेगा।

आंटी जी ने मेरे हाथ अपने बोबों पर रखने को बोला, और खुद का मुँह मेरी गर्दन पर लगा कर मेरी गर्दन चूसने लगी, बहुत ऊंचे वोल्ट के झटके मुझे लगने लगे, मुझसे सब कुछ बर्दाश्त बाहर होता लगा। मेरे मुँह से आहें और सिसकारी निकलने लगी, मैंने आंटीजी के बोबे भींच लिए, आंटी जी भी मजे और बोबों में हो रहे थोड़े दर्द से आहें और सिसकारी भरने लगी। फिर वो अकड़ने लगी और निढाल मेरे ऊपर पसर गई।                              “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

थोड़ी देर तो मैं आंटीजी के बोबे दबाता रहा और फिर अपने हाथ उनके बदन पर फिराने लगा।

उनमे चेतना आने लगी, फिर वो सक्रिय हो गई एक बार फिर चूमा चाटी का दौर शुरू हो गया, मेरा लंड अब भी आंटीजी की चूत में घुसा हुआ फुफकार मार रहा था। अब मैंने नीचे से धक्के पे धक्के लगाने शुरू किये और ऊपर से आंटीजी ने, दोनों के बदन टकराने पर फच फच की आवाज होती थी। जब मेरे झड़ने की बारी आई तो मेरे हाथो की कसावट थोड़ा ढीले होने लगी तो आंटीजी बोली कि बस थोड़ा सा और सब्र कर ले १०-५ धक्कों में मैं भी आई……………….. और बस…………………                                                                            “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

अगले ४-५ दिन तो न रात और न दिन, न मैं सो पा रहा था और ना ही लंड को बैठने की फुर्सत मिल रही थी। मेरी भूख बढ़ रही थी और मेरे खाने की परवाह दोनों करती थी, मेरा बदन गदराने लगा। एक महीने में ६ किलो वजन बढ़ गया, और मेरा चेहरा चमकने लग गया। लेकिन फिर दोपहर में एक घंटा दोनों हमारे ऊपर मकान में एक साथ होती और हम लोग १-२-३ बार जितना हो सकता मजे करते। अब बाकी समय हम लोग चुदाई नहीं करते थे…………. मैं भी अब बाकी समय में अपनी पढ़ाई में जबरदस्ती मन लगाने लगा।                                                                  “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

अचानक एक शाम को फिर राधा ने मुझको कहा- देवर जी, आज रात को दूध पीने आना !

अब यह सब मेरे लिए साधारण बात थी, सो जब रात को मैं दूध पीने गया तो कमरे में जाते ही राधा मेरे पैर छूकर मुझसे लिपट गई, आज फिर से मैं अकबकाया सा देख रहा था कि यह क्या हो रहा है, तो राधा बोली- मेरे प्यारे देवर, मेरी मन्नत पूरी हो गई, मेरे दिन चढ़ गए हैं और ये सब तुम्हारे वरदान के कारण हुआ है…………

मैंने सोचा- काहे का मेरा वरदान, भाभी यदि तूने ही आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं की होती तो मेरी मर्दानगी तो टॉयलेट में ही धरी रह जाती।                                                                                           “Pahli Chudai ki Sexy Kahani”

कुछ महीने बाद एक सुन्दर सा बेटा राधा के पास था।

ये कहानी Meri Pahli Chudai ki Sexy Kahani  आपको कैसी लगी कमेंट करे……..

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