Talab Ke Kinare Meri Chudai Ki 4 Ladko Ne – तालाब के किनारे मेरी चुदाई

Talab Ke Kinare Meri Chudai Ki 4 Ladko Ne

मेरी एक सहेली एक गावं से थी हम दोनो बहुत क्लोज़ थे एक साथ ही कॉलेज मे एड्मिशन लिया एक साथ ही ब्लू फिल्म देखनी शुरू की और एक साथ ही लड़के पटाये और एक साथ ही चुदाई शुरू की। हम दोनो एक दूसरे की नस नस से वाकिफ़ थे उसका गावं बिल्कुल पिछड़ा हुआ था जहाँ रात को अक्सर लाइट नही होती थी लोग बाहर बिस्तर लगा कर सोते थे और नहाने भी बाहर बड़े तालाब पर जाते थे। Talab Ke Kinare Meri Chudai Ki 4 Ladko Ne.

मुझे तो बाहर नहाने मे बड़ा मज़ा आता था तालाब बिल्कुल गावं से बाहर था सिर्फ़ औरतो के लिये हम दोनो तो बिल्कुल नंगे होकर खूब नहाते थे हमें पता था की कुछ लड़के झाड़ियो से हमें देखते थे हम नहाते हुये एक दूसरे के बोबे दबाते और अपनी उंगली से चुदाई भी करते थे और खुद को शांत करके वापस आ जाते थे। बाकी सब तो ठीक था पर मैं बाहर नहीं सोती थी क्योकि मुझे अन्धेरे से और भूतो से बहुत डर लगता था। मेरी सहेली जानती थी इसलिये उसने घर का एक कमरा जो की पिछले हिस्से मे था मेरे लिये ठीक करा दिया था। वो एक छोटे तालाब की तरफ खुलता था, जिससे थोड़ी ठंडी हवा आती थी बाकी सब बाहर सोते थे।

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रात को मेरी सहेली मेरे पास सोने का बहाना बना के कभी कभी गावं के लड़के से चुदवाने जाती थी। जब वो नहीं होता था तब बाहर सोती थी। एक रात को वो उसे घर ले आई थी और कहने लगी उसका एक दोस्त मुझे चोदना चाहता है मैने कहाँ मैं किसी गँवार से नही चुदवाउंगी पता नही ठीक से कुछ करेगा भी की नही। उसने बहुत कहा पर मैं नहीं मानी। फिर दूसरे दिन जब हम नहा के लौटे तो एक बहुत स्मार्ट सा लड़का हमें रास्ते मे मिला। उसने मेरी सहेली से बात की पर मेरी तरफ देखा भी नहीं मुझे बुरा लगा। पर मैने वापस आकर पूछा कि वो कौन है तो वो कहने लगी है कोई गावं का गँवार तुझे क्या? मैने बहुत पूछा तो कहा की प्रधान साहब का लड़का है शहर मे पढ़ता है।
“Talab Ke Kinare Meri”

मैने कहा इससे बात करा इससे चुदवाने मे तो मज़ा आ जायेगा वो बोली यह तो मुश्किल है, मैं कुछ भी करूँगी तो वो बोली हमारे यहाँ छोटे तालाब के पास एक भूत है अगर वो खुश हो जाये तो जो चाहो वो तुम्हारे बस मे आ जायेगा। मैने कहा ना बाबा मुझे भूतो से डर लगता है। तू उसे बोल ना तो कहने लगी उसे शहर की लड़कियां पसंद नहीं है, वो नहीं मानेगा, रोज़ वो हमें मिलता सहेली से बात करता और मुझे देखता तक नहीं यह बात मुझे सता रही थी। मैने आख़िर अपनी सहेली की बात मान ली। मैने पूछा क्या करना होगा तो वो बोली सबके सोने के बाद बताउंगी। मैं रात का इंतज़ार करने लगी जब सब सो गये तो वो आई उसके पास एक चटाई थी उसने कहा चलो मेरे साथ तालाब के पास आकर कहा अब तुम अपने कपड़े उतार के तालाब मे डुबकी लगा के आओ। “Talab Ke Kinare Meri”

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मैने कुछ कहना चाहा तो कहने लगी कुछ भी मत बोलना बस जो कहा है करो मैं जल्दी नंगी हो के तालाब मे डुबकी लगा कर आई और वापस आई तो कपड़े नही थे और मेरी सहेली भी नहीं थी मैने आवाज़ लगाई तो उसने कहा अब उस पेड़ के नीचे बैठ जाओ तुम्हे किसी और को चोदते हुये देखकर भूत से कहना होगा की तुम्हे भी ऐसे चुदना है उस लड़के से अगर भूत खुश हो गया तो तुम जिससे चाहो चुदवा सकती हो पर पहले वो चेक करेगा किसी ना किसी तरह बस तुम इसके अलावा कुछ और मत कहना और उसकी आवाज़ आते ही अपनी आँखे बंद कर लेना वरना कभी नही चुदवा पाओगी।

मैने पलटकर देखा तो वो नंगी एक चटाई पर चुद रही थी वो लड़का उसे ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था, क्या काला लंड था उसका, मेरी तो चूत गीली होने लगी थी। वो उसे लेटा के बैठा के पीछे से हर तरह से चोद रहा था। मैंने भूत से कहा मुझे भी प्रधान के लड़के से ऐसे ही चुदना है। कुछ देर रुकने के बाद एक आवाज़ आई लेट जाओ और में आँखे बंद करके लेट गयी थोड़ी देर मे मुझे लगा की कोई भीम सा एक आदमी मेरे उपर झुका हुआ है पर डर से आँखे नही खोली उसने मेरे बोबे पर काटा उन्हे खूब ज़ोरो से दबाया मेरी गीली चूत मे उंगली डाल डाल के मेरा बुरा हाल कर दिया फिर उसने अपना लंड मेरी चूत में झटके से डाल दिया। मेरी तो जान निकल गयी और ऐसा लगा जैसे सच मे किसी घोड़े का लंड हो इतना बड़ा इतना मोटा और इतना कड़क मैं तो चीख भी नहीं पाई बहुत देर तक वो मुझे चोदता रहा और थोड़ी देर मे मुझे भी अच्छा लगने लगा। मैंने भी उचक उचक के चुदवा लिया। “Talab Ke Kinare Meri”

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फिर वो कहीं चला गया। मेरी सहेली ने कहा उठो घर चलो सवेरा होने को है मैने कहा वो खुश तो हुआ ना? तो कहने लगी ये कल पता चलेगा अगर वो पट गया तो हाँ वरना कल फिर यही करना मैं मान गयी पर उसने फिर मेरी तरफ देखा तक नही। फिर रात को मैंने वही किया वही आवाज़ आई इस बार मैं तैयार थी उस मोटे लंड के लिये पर इस बार लगा जैसे कोई एक दुबला पतला सा छोटा सा लड़का हो उसने मुझे घुटनों के बल खड़ा करके मेरी गांड मे उंगली डाली और फिर अपना लंड रख के पेल दिया। मेरी गांड अब तक कुंवारी थी और मेरी तो जान निकल गयी। आँखो से आँसू निकल आये पर चुपचाप चुदवाया जी भरके चोदने के बाद भूत चला गया। में घर आ गयी और अगले दिन वो मुझे देखके मुस्कुराया और कहने लगा रात को तालाब पर मिलना।

मैं तो खुशी से पागल हो रही थी। मैं बिल्कुल तैयार होकर रात को उसका इंतज़ार करने लगी वो आया आते ही मुझे चूमने लगा मेरे बोबे मसलने लगा मैं यही तो चाहती थी उसने मेरे सारे कपड़े खोल के मुझे नंगा कर दिया फिर खुद भी नंगा हो गया हम दोनो एक दूसरे को चूमते और चाटते जा रहे थे फिर 69 मे आकर मैं उसका लंड चूसने लगी और वो मेरी चूत अपनी जीभ से चोदने लगा थोड़ी देर बाद हमसे रहा नहीं गया और उसने उपर आकर मेरी चूत मे अपना लंड डाल दिया। क्या खूब चोदा उसने मुझे? में तो बस सब कुछ भूल के चुदाई का मज़ा ले रही थी और हम दोनो साथ ही झड़ गये। वो मेरे बोबे से खेलता हुआ लेटा था। “Talab Ke Kinare Meri”

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मैने उसे कहा तुमसे चुदने के लिये मुझे भूत को पटाना पड़ा तो वो हंसने लगा और कहा वो तो मेरे दोस्त थे तुम्हे चुदना था और मुझे चोदना पर तुमने मना किया तो थोड़ी शरारत की। बस में गुस्सा होने का नाटक करने लगी तो उसने मुझे चूमते हुये कहा सब चुदाई के लिये ही था। मेरा लंड पहले दिन से तुम्हारी चूत के नाम की मुठ मार रहा था तुम्हे मज़ा नही आया? मैने कहा आया तो पर तुम्हारे जितना तो कभी नहीं। हम दोनो ने पूरी रात 3 बार चुदाई की और फिर में और मेरी सहेली और उन 4 लड़को ने मिलकर चुदाई भी की । “Talab Ke Kinare Meri”

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